भारत के पूर्वी तट पर स्थित ओडिशा संस्कृति, विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिकता से समृद्ध है। यहाँ ओडिशा के शीर्ष 10 पर्यटन स्थल हैं जो दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं:
🏛 1. जगन्नाथ मंदिर, पुरी
क्यों जाएँ: चार धाम तीर्थ स्थलों में से एक; वार्षिक रथ यात्रा (रथ उत्सव) के लिए प्रसिद्ध।
हाइलाइट: गैर-हिंदू प्रवेश नहीं कर सकते, लेकिन बाहर से देख सकते हैं।
जगन्नाथ मंदिर: भारत के ओडिशा राज्य के पुरी नगर में स्थित एक प्राचीन और अत्यंत प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है। यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के अवतार "जगन्नाथ" को समर्पित है, जो उनकी भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ यहाँ विराजमान हैं। यह मंदिर वैष्णव परंपरा का महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है और चार धामों (पुरी, द्वारका, बद्रीनाथ, रामेश्वरम) में से एक माना जाता है।
जगन्नाथ मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में गंगा वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव द्वारा कराया गया था। मंदिर की वास्तुकला कलिंग शैली की है, जो विशालता और भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर का शिखर लगभग 65 मीटर ऊँचा है और इसके ऊपर स्थित ‘नीलचक्र’ (धातु से बना चक्र) दूर से ही दिखाई देता है।
मंदिर में भगवान जगन्नाथ की मूर्ति अन्य हिन्दू मंदिरों की तरह पत्थर या धातु की नहीं, बल्कि नीम की लकड़ी से निर्मित होती है, जिसे हर 12-19 वर्षों में ‘नवकलेवर’ नामक प्रक्रिया के अंतर्गत बदला जाता है। यह प्रक्रिया अत्यंत पवित्र और रहस्यमयी मानी जाती है।
पुरी का रथ यात्रा उत्सव विश्वप्रसिद्ध है, जिसमें तीनों देवताओं की मूर्तियाँ विशाल रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करती हैं। लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में भाग लेते हैं।
यह मंदिर केवल धार्मिक ही नहीं, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। मंदिर में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है, लेकिन वे रथ यात्रा में शामिल हो सकते हैं।
जगन्नाथ मंदिर आस्था, परंपरा, और आध्यात्मिकता का प्रतीक है, जो पूरे भारत ही नहीं, विश्वभर के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
🌊 2. पुरी बीच
क्यों जाएँ: बंगाल की खाड़ी के किनारे एक साफ और सुंदर समुद्र तट।
हाइलाइट: सूर्योदय, ऊँट की सवारी और स्थानीय समुद्री भोजन के लिए लोकप्रिय।
पुरी बीच, ओडिशा के तट पर स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जो बंगाल की खाड़ी के किनारे बसा हुआ है। यह समुद्र तट न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह स्थल पुरी शहर में स्थित है, जो भगवान जगन्नाथ के विश्वप्रसिद्ध मंदिर के लिए भी जाना जाता है।
पुरी बीच अपनी सुनहरी रेत, शांत वातावरण और लहरों की गूंज के लिए पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहाँ सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है। सुबह-सुबह लोग यहाँ टहलते हैं, ध्यान लगाते हैं और समुद्र की ठंडी हवा का आनंद लेते हैं। यह बीच परिवारों, कपल्स और फोटोग्राफर्स के लिए भी एक आदर्श स्थान है।
पुरी बीच पर पर्यटकों के लिए कई गतिविधियाँ उपलब्ध हैं जैसे ऊंट की सवारी, घुड़सवारी, वाटर स्पोर्ट्स, और रेत की मूर्तियाँ देखना। खास तौर पर सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक की कला यहाँ आकर्षण का केंद्र होती है। बीच के पास कई होटल, रिसॉर्ट्स और भोजनालय भी हैं, जहाँ ओडिया व्यंजन जैसे दालमा, चिंगुड़ी मलाई करी और सीफूड का आनंद लिया जा सकता है।
पुरी बीच की यात्रा अक्टूबर से फरवरी के बीच सबसे उपयुक्त होती है, जब मौसम सुहावना होता है। यह स्थान केवल प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का संगम भी है। इसलिए, पुरी बीच न केवल विश्राम और मनोरंजन का स्थान है, बल्कि आत्मिक शांति का अनुभव करने का भी उत्तम माध्यम है।
🐘 3. चिल्का झील
क्यों जाएँ: एशिया का सबसे बड़ा खारे पानी का लैगून; पक्षी देखने और नौका विहार के लिए आदर्श।
हाइलाइट: प्रवासी पक्षियों और लुप्तप्राय इरावदी डॉल्फ़िन को देखें।
चिल्का झील, ओडिशा – एक प्राकृतिक अद्भुत
चिल्का झील भारत के ओडिशा राज्य में स्थित एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। यह झील बंगाल की खाड़ी के तट के पास फैली हुई है और इसकी लंबाई लगभग 64 किलोमीटर तथा चौड़ाई 20 किलोमीटर तक फैली है। यह झील गंजाम, खुर्दा और पुरी जिलों में फैली हुई है और इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 1,100 वर्ग किलोमीटर है।
चिल्का झील जैव विविधता का अद्भुत केंद्र है। यह पक्षियों का एक महत्वपूर्ण प्रवासी स्थल है, जहाँ हर साल सर्दियों में साइबेरिया, ईरान, मध्य एशिया और हिमालय से हजारों पक्षी आते हैं। यह स्थान खास तौर पर बर्ड वॉचिंग के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ देखे जाने वाले प्रमुख पक्षियों में फ्लेमिंगो, ग्रे हेरॉन, पेलिकन, और किंगफिशर शामिल हैं।
चिल्का झील समुद्री जीवों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ दुर्लभ इरावदी डॉल्फ़िन देखी जा सकती हैं, जो केवल कुछ गिने-चुने स्थानों पर पाई जाती हैं। इसके अलावा झील में मछलियों की भी अनेक प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो स्थानीय मछुआरों की आजीविका का आधार हैं।
झील के आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थल में कालीजाई मंदिर, नलाबाना द्वीप (जो एक पक्षी अभयारण्य है), सतपाड़ा और बरहामपुर शामिल हैं। झील की सुंदरता और शांत वातावरण पर्यटकों को बहुत आकर्षित करता है।
सरकार और कई पर्यावरणीय संगठन इस झील के संरक्षण और सतत विकास के लिए प्रयासरत हैं, जिससे इसकी जैविक विविधता और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखा जा सके।
इस प्रकार, चिल्का झील न केवल प्राकृतिक संपदा है, बल्कि यह पर्यावरण, संस्कृति और पर्यटन का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है।
🏯 4. कोणार्क सूर्य मंदिर
क्यों जाएँ: यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल; 13वीं शताब्दी का एक विशाल रथ जैसा मंदिर।
हाइलाइट: वास्तुकला का अद्भुत नमूना और विस्तृत पत्थर की नक्काशी।
कोणार्क सूर्य मंदिर, ओडिशा
कोणार्क सूर्य मंदिर भारत के ओडिशा राज्य के पुरी जिले में स्थित एक भव्य हिंदू मंदिर है, जो सूर्य देव को समर्पित है। यह मंदिर 13वीं शताब्दी में गंगा वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम द्वारा बनवाया गया था। मंदिर का निर्माण कलिंग स्थापत्य शैली में हुआ है और इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में शामिल किया गया है।
यह मंदिर मुख्य रूप से अपने विशाल रथ के आकार के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें 12 विशाल चक्र (पहिए) और सात घोड़े हैं। ये पहिए समय को दर्शाते हैं और इनकी नक्काशी इतनी अद्भुत है कि आज भी लोग इनके माध्यम से समय का अनुमान लगा सकते हैं। मंदिर के शिल्प और नक्काशी में धार्मिक, सामाजिक और ऐतिहासिक कथाओं को उकेरा गया है।
माना जाता है कि इस मंदिर की रूपरेखा सूर्य देव के रथ की तरह है जो पूर्व दिशा की ओर उगते सूरज की ओर अग्रसर है। मंदिर में पत्थरों पर की गई अत्यंत सुंदर और जटिल मूर्तिकला, विशेष रूप से नारी मूर्तियों और मिथकीय प्राणियों की चित्रण, उसकी स्थापत्य कला का प्रमाण है।
कोणार्क सूर्य मंदिर एक समय में सक्रिय पूजा स्थल था, परंतु अब यह मुख्यतः एक ऐतिहासिक धरोहर के रूप में देखा जाता है। यह मंदिर न केवल वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का भी प्रतीक है।
हर वर्ष कोणार्क डांस फेस्टिवल और सूर्य महोत्सव यहां आयोजित किए जाते हैं, जो भारत और दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यह मंदिर भारतीय कला, स्थापत्य और श्रद्धा का एक गौरवपूर्ण प्रतीक है।
🏞 5. सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान
क्यों जाएँ: झरने, घने जंगल और विविध वन्यजीवों वाला एक बाघ अभयारण्य और जीवमंडल।
हाइलाइट: प्रकृति प्रेमियों और इको-पर्यटकों के लिए आदर्श।
सिमिलिपल राष्ट्रीय उद्यान, ओडिशा के मायूरभंज जिले में स्थित, लगभग 2,750 वर्ग किलोमीटर में फैला एक प्रमुख बायोस्फीयर रिज़र्व और बाघ रिज़र्व है । इसका नाम ‘सिमुल’ यानी लाल सिल्क कॉटन वृक्षों की भरमार के कारण पड़ा है ।
प्रमुख विशेषताएँ:
राष्ट्रीय उद्यान व tiger रिज़र्व: 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत बाघ रिज़र्व घोषित हुआ था। अप्रैल 2025 में इसका 845.70 वर्ग किमी क्षेत्र राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया, जिससे यह ओडिशा का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान बन गया ।
जैव विविधता: सिमिलिपल में लगभग 55 स्तनधारी (जैसे रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, गोर, चार‑सींग वाला एंटीलोप), 361 पक्षी, 62 सरीसृप और 21 उभयचर प्रजातियाँ पाई जाती हैं । इसमें दुर्लभ ‘मेलानिस्टिक’ (काले) बाघों की प्राकृतिक आबादी भी है, जिनकी संख्या अनुमानित 10‑12 तक है ।
प्राकृतिक झरने: उद्यान में दो गहरे झरने—बरेहि पानि (399 मी) और जोरंडा (150 मी)—भारत के ऊँचे झरनों में गिने जाते हैं ।
वन संरचना: यहां उष्णकटिबंधीय सर्दा पर्णपाती जंगल, सैल वन, सवाना, नदी घाटियाँ और पहाड़ी श्रृंखलाएँ है, जिनमें मेघासानी (≈1165 मी) उच्चतम शिखर है ।
संरक्षण एवं चुनौतियाँ: मुख्य वन में इंसानों की खेती‑बाड़ी या पशुपालन वर्जित है। ग्रामस्थों का हरण, खासकर शेष ‘बाकुआ’ गांव को राष्ट्रीय उद्यान से बाहर रखा गया ।
ताज़ा पहल जैसे AI कैमरे, विशेष सुरक्षा बल, और चरागाह प्रबंधन से तेंदुए और जंगली हिरणों की वृद्धि बल प्राप्त हो रही है ।
पर्यटन और सुविधाएँ: सफारी: दिन की सफारी के लिए कलियानी और पिथाबाटा गेट हैं, जहाँ ऑनलाइन पर्चियों की व्यवस्था है ।
ट्रेकिंग व जलप्रपात ट्रिप: बरेहि पानि व जोरंडा झरने घूमने लायक हैं। बर्ड-वॉचिंग, जंगल ट्रेकिंग और सांस्कृतिक विज़िट भी लोकप्रिय गतिविधियाँ हैं ।
रहने की व्यवस्था: उद्यान के आस-पास बारipada, जशिपुर में इकोटूरिज्म कैम्प, वन विश्राम गृह और स्थानीय होमस्टे उपलब्ध हैं; रात्रि प्रवास के लिए साइट‑विशिष्ट कैंप भी हैं ।
खास जानकारी: पार्क नवंबर से मार्च तक खुला रहता है (बारिश के कारण जून‑अक्टूबर बंद रहता है) ।
पर्यटकों के लिए पर्यावरण‑हितैषी नियम हैं—प्लास्टिक व गैर‑शाकाहारी पदार्थ प्रतिबंधित हैं ।
निष्कर्ष: सिमिलिपल राष्ट्रीय उद्यान ओडिशा का गौरवशाली संरक्षण क्षेत्र है, जहाँ संयमित पर्यटन, आदिवासी संस्कृति, उन्नत सुरक्षा व वैज्ञानिक मैनेजमेंट एक साथ मिलते हैं। यह भारत के जैव विविधता‑समृद्ध जंगलों में से एक है, जो न केवल तेंदुओं, हाथियों व दुर्लभ प्रजातियों का घर है, बल्कि एक सतत पर्यटन मॉडल का आदर्श भी प्रस्तुत करता है।
🏝 6. गोपालपुर-ऑन-सी
क्यों जाएँ: एक शांत समुद्र तटीय शहर जो शांत समुद्र तट की छुट्टी के लिए एकदम सही है।
हाइलाइट: जल क्रीड़ा और सुंदर सूर्यास्त।
गोपालपुर-ऑन-सी, उड़ीसा की सुंदर और ऐतिहासिक तटीय शहर है, जो बंगाल की खाड़ी के किनारे गंजाम जिले में स्थित है । यह शहर लगभग 7,221 की जनसंख्या वाला एक अधिसूचित क्षेत्र परिषद है, जो लगभग 16 किलोमीटर दूर ब्रह्मपुर (बरहामपुर) से जुड़ा है ।
इतिहास में, गोपालपुर पहले कलिंग साम्राज्य के समुद्री व्यापार का एक महत्वपूर्ण केन्द्र था—यहां से बर्मा, जावा और सुमात्रा के लिए जहाज रवाना होते थे । ब्रिटिश काल में प्राचीन लाइटहाउस, गोदाम, बंगलों और "द पाम बीच रिजॉर्ट" जैसे आधुनिक बीच रिसॉर्ट का निर्माण हुआ, और यह ओबेरॉय समूह की पहली पहल में से था । द्वितीय विश्व युद्ध (1942) के दौरान बंदरगाह बंद हो गया, लेकिन 2013 में एक आधुनिक गहरे समुद्री बंदरगाह के रूप में वापस स्थापित किया गया—अब अडानी पोर्ट्स द्वारा संचालित ।
गोपालपुर बीच चौड़ी, सुनहरी रेत, नारियल व काजू के पेड़ों की कतारें, और खाड़ी की लहरों की आवाज के साथ एक शांत, स्वच्छ वातावरण प्रदान करता है । यहां का लाइटहाउस (1871 में निर्मित) और पुराने बंदरगाह के खण्डहर इसकी पहचान बन चुके हैं । समुद्र में गहरे पानी के कारण तैराकी के लिए उपयुक्त नहीं, लेकिन लुभावने सूर्योदय-संध्या दृश्य, अकेले चलना (stroll), बोटिंग और कयाकिंग जैसी गतिविधियां लोकप्रिय हैं ।
यहां सालाना गोपालपुर बीच फेस्टिवल होता है, जिसमें पारंपरिक कला, संगीत, भोजन, हस्तशिल्प और स्थानीय संस्कृति की झलक होती है, जो दिसंबर में आयोजित होती है । प्रकृति प्रेमियों के लिए, ऑलिव रिडली कछुओं का रैप्चर और संग्रहर प्रसंग भी देखने योग्य है—जहां World Ocean Day जैसे अवसरों पर फोटो प्रदर्शनी का आयोजन होता है ।
जलवायु उष्णकटिबंधीय है—गर्मी में अधिकतम तापमान लगभग 35°C, सर्दियों में 23°C के आसपास रहता है । नवंबर–फरवरी यात्रियों के लिए सबसे आदर्श समय माना जाता है ।
गोपालपुर-ऑन-सी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी समृद्ध है। चिल्का झील और तटवर्ती धाराओं के कारण यह पक्षी व जलजीव प्रेक्षित स्थान हो चुका है । निकटवर्ती आकर्षणों में चिल्का झील (90 कि.मी दक्षिण में), तटवर्ती ट्रेडिंग हब और ब्रह्मपुर शहर में पारंपरिक बाजार शामिल हैं।
निष्कर्ष: गोपालपुर एक शांत, स्वच्छ और समृद्ध तटीय स्थल है, जहां प्रकृति, इतिहास और संस्कृति का अद्वितीय मेल है। यदि आप एक आरामदेय, कम भीड़-भाड़ वाले, वैश्विक इतिहास से जुड़े अनुभव की खोज में हैं—तो गोपालपुर-ऑन-सी आपके लिए सर्वोत्तम ग्रीष्मकालीन गंतव्य है।
🏰 7. धौली हिल
क्यों जाएँ: कलिंग युद्ध और अशोक के बौद्ध धर्म में परिवर्तन का स्थल।
हाइलाइट: शांति स्तूप और प्राचीन रॉक एडिट।
हीराकुंड बाँध, ओडिशा राज्य के संबलपुर ज़िले में स्थित है और यह भारत के सबसे लंबे मिट्टी के बाँधों में से एक है। महानदी नदी पर निर्मित यह बाँध जल संसाधन, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और विद्युत उत्पादन के उद्देश्य से बनाया गया था। हीराकुंड बाँध की आधारशिला 15 मार्च 1946 को रखी गई थी और इसका निर्माण 1957 में पूरा हुआ। यह स्वतंत्र भारत की पहली प्रमुख बहुउद्देश्यीय नदी परियोजना मानी जाती है।
बाँध की कुल लंबाई लगभग 25.8 किलोमीटर (16 मील) है, जिसमें मुख्य बाँध के साथ-साथ दो बड़े तटबंध भी शामिल हैं। इसका जलाशय लगभग 746 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है, जो इसे भारत का एक प्रमुख जलाशय बनाता है।
हीराकुंड बाँध का मुख्य उद्देश्य सिंचाई के लिए जल आपूर्ति और बाढ़ नियंत्रण है। यह ओडिशा और छत्तीसगढ़ के लाखों एकड़ भूमि की सिंचाई करता है। साथ ही, यह बाँध 307.5 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता के साथ क्षेत्र में ऊर्जा की आपूर्ति करता है।
पर्यटन की दृष्टि से भी हीराकुंड बाँध एक लोकप्रिय स्थल है। यहाँ स्थित "नेहरू मिनार" और "गांधी मिनार" से बाँध और जलाशय का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। सर्दियों में यहाँ पक्षियों की विभिन्न प्रजातियाँ भी देखी जाती हैं, जो इसे एक पक्षी प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान बनाती हैं।
हालाँकि, बाँध के निर्माण से कुछ गाँवों और ऐतिहासिक स्थलों को डूबना पड़ा, जिससे विस्थापन की समस्या भी सामने आई। फिर भी, हीराकुंड बाँध भारत की इंजीनियरिंग उपलब्धियों का प्रतीक है और आज भी इसकी भूमिका कृषि, ऊर्जा और जल प्रबंधन में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
⛩ 8. लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर
क्यों जाएँ: ओडिशा के सबसे पुराने और सबसे बड़े मंदिरों में से एक।
हाइलाइट: कलिंग वास्तुकला अपने सबसे बेहतरीन रूप में।
लिंगराज मंदिर ओडिशा के भुवनेश्वर में स्थित एक प्राचीन और भव्य हिन्दू मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें यहाँ 'लिंगराज' के रूप में पूजा जाता है। यह 11वीं शताब्दी में सोमवंशी राजा ययाति द्वितीय द्वारा बनवाया गया था। यह मंदिर कलिंग वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें विशाल गोपुरम, सुंदर मूर्तियाँ और नक्काशीदार पत्थर हैं। मंदिर परिसर में कई छोटे-छोटे मंदिर भी हैं। यहाँ का मुख्य शिवलिंग 'हरिहर' रूप में है, जिसमें शिव और विष्णु दोनों का सम्मिलन माना जाता है। यह मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है।
🌳 9. नंदनकानन प्राणी उद्यान
क्यों जाएँ: प्रसिद्ध चिड़ियाघर और वनस्पति उद्यान; सफ़ेद बाघों का घर।
हाइलाइट: सफ़ारी की सवारी और एक्वेरियम।
नंदनकानन प्राणी उद्यान, जिसका अर्थ “स्वर्ग का बगीचा” है, ओडिशा के भुवनेश्वर—कटक मार्ग पर स्थित एक 437 हेक्टेयर (1,080 एकड़) क्षेत्र में फैला विश्व प्रसिद्ध चिड़ियाघर और वनस्पति उद्यान है । इसकी स्थापना 1960 में हुई और 1979 में यह आम जनता के लिए खोल दिया गया । उद्यान में श्वेत बाघ सफारी (1991 से), शेर सफारी, हिरण सफारी, भालू सफारी, तितली उद्यान, ऑर्किड हाउस, रिप्टाइल हाउस, और कंजिया झील पर नौका विहार जैसी आकर्षक सुविधाएँ उपलब्ध हैं । यह भारतीय वन्यजीवों, जैसे कि श्वेत बाघ, ग़रियाल, और पेंगोलिन, के संरक्षण एवं प्रजनन कार्यक्रमों में अग्रणी है । 2009 में यह भारत का पहला ऐसा चिड़ियाघर बना जिसे वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ ज़ूज़ एंड एक्वैरियम्स ने मान्यता दी । हर साल यहाँ लगभग २.६–३.२ मिलियन पर्यटक आते हैं ।
⛰ 10. हीराकुंड बांध और संबलपुर
क्यों जाएँ: दुनिया के सबसे लंबे मिट्टी के बांधों में से एक।
हाइलाइट: जलाशय पर मनोरम दृश्य और नौका विहार।
हीराकुंड बांध ओडिशा के संबलपुर जिले में महानदी पर स्थित है। यह दुनिया के सबसे लंबे मिट्टी के बांधों में से एक है, जिसकी लंबाई लगभग 25.8 किलोमीटर है। इसका निर्माण 1948 में शुरू हुआ और 1957 में पूरा हुआ। इस बांध का मुख्य उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन है। हीराकुंड बांध से लगभग 75,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की सिंचाई होती है। इसमें एक बड़ा जलाशय है जो पर्यटन के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। यह बांध ओडिशा की अर्थव्यवस्था और कृषि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है |

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